
हनुमान अंश: एक सच्ची भक्ति और सेवा की यात्रा जो दिल को छू जाती है
2026 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म हनुमान अंश निर्देशक-लेखक-निर्माता विशाल चतुर्वेदी की एक बेहद खास और दिल को छू लेने वाली रचना है। नीम करोली बाबा (नीब करौरी बाबा) के प्रारंभिक जीवन पर आधारित यह बायोपिक-भक्ति ड्रामा बिना किसी बड़े स्टार या भव्य बजट के सिर्फ ईमानदारी, श्रद्धा और सच्ची कहानी के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बना चुकी है। कम बजट में बनी यह फिल्म शब्द-मुख (word of mouth) से धीरे-धीरे ब्लॉकबस्टर बन गई और लाखों लोगों तक बाबा के संदेश को पहुंचाया।
कहानी का सार
कहानी स्वतंत्रता पूर्व भारत के ब्रज क्षेत्र के अकबरपुर से शुरू होती है। तेरह वर्षीय लक्ष्मी नारायण (बाद में लक्ष्मण दास और नीम करोली बाबा) अपनी प्यारी मां की मृत्यु के बाद घर छोड़ देता है। उसका मानना है कि मां राम के पास गई हैं और हनुमान जी ही उसे राम तक पहुंचा सकते हैं। वह हनुमान चालीसा से प्रेरित होकर उत्तर भारत के मंदिरों, जंगलों, नदियों और गांवों में भटकता है। मौन, तप, भिक्षा और प्रकृति के सान्निध्य में वह धीरे-धीरे सभी आसक्तियों को छोड़ता जाता है।
फिल्म दिखाती है कि ईश्वर की खोज सिर्फ भागने में नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में है। “सबको प्यार करो, सबकी सेवा करो, सबको खिलाओ और राम का नाम स्मरण करो” — बाबा का यह संदेश कहानी के केंद्र में है। एक महत्वपूर्ण प्रसंग ट्रेन वाला है, जहां लक्ष्मण दास को टिकट न होने पर उतारा जाता है, लेकिन चमत्कारिक घटनाओं के बाद अधिकारी क्षमा मांगते हैं और उसी स्थान पर स्टेशन बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। यही जगह नीम करोली के नाम से जानी जाती है। फिल्म बाबा के युवा काल पर केंद्रित है और सीक्वल की संभावना भी छोड़ती है।
अभिनय
शोभिनव सत्य (Shobhinaw Satyaa) ने युवा लक्ष्मी नारायण/बाबा की भूमिका निभाई है। यह किरदार बेहद संवेदनशील था क्योंकि लाखों लोग बाबा के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। शोभिनव ने इसे सहजता, गंभीरता और आंतरिक शांति के साथ निभाया है। उनकी आंखों में दर्द, खोज और बाद में करुणा साफ झलकती है। चंदन आनंद सहित सहायक कलाकारों ने भी अपने किरदारों को प्रामाणिक बनाया है। नए चेहरे होने के बावजूद प्रदर्शन में कोई बनावटीपन नहीं है, जो फिल्म को और विश्वसनीय बनाता है।
निर्देशन, पटकथा और तकनीकी पक्ष
विशाल चतुर्वेदी (जो डॉक्टर से फिल्ममेकर बने) ने कहानी को बहुत सादगी और सम्मान के साथ पेश किया है। फिल्म चमत्कारों को अतिरंजित करके नहीं दिखाती, बल्कि व्यक्ति के अंदर के बदलाव और सेवा के महत्व पर जोर देती है। लोकेशन्स, वेशभूषा और भाषा (अवधी, ब्रज, बुंदेली के रंग) प्रामाणिक लगते हैं। सिनेमैटोग्राफी प्रकृति और सादगी को खूबसूरती से कैद करती है। 150 मिनट की अवधि में कहानी बिना जल्दबाजी के आगे बढ़ती है।
संगीत — फिल्म की आत्मा
संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। साधु सुशील तिवारी, ऋषि पाठक, श्रेयस धर्माधिकारी, सुनील लोधी और अन्य कलाकारों के भजन दिल को छूते हैं। “मैंने तेरे ही भरोसे”, “जय हनुमान”, “पार्वती”, “आवागमन” जैसे गाने लोक परंपरा से जुड़े हैं और भक्ति का माहौल बना देते हैं। संगीत कच्चा, मिट्टी की खुशबू वाला और भावपूर्ण है — यही कारण है कि गाने फिल्म के बाहर भी वायरल हुए।
क्यों देखें?
हनुमान अंश सिर्फ एक धार्मिक फिल्म नहीं है। यह दर्द से भक्ति की ओर, व्यक्तिगत खोज से सार्वभौमिक सेवा की ओर जाने वाली यात्रा है। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में यह याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति अहंकार छोड़ने, दया और सेवा करने में है। परिवार के साथ देखने लायक, शांति और प्रेरणा देने वाली फिल्म है। बड़े बजट और स्टार पावर के बिना सिर्फ सच्ची भावना से बनी यह फिल्म साबित करती है कि जब कहानी दिल से निकली हो, तो दर्शक खुद उसे अपना लेते हैं।
रेटिंग: 4/5 (सकारात्मक और उत्साहजनक अनुभव के लिए)
जय श्री राम। जय बजरंगबली। नीम करोली बाबा की जय।
