
नई दिल्ली । पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनिया के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। चैटजीपीटी जैसे जेनरेटिव AI टूल्स के आने के बाद यह असर और तेज हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI न तो पूरी तरह नौकरियां खत्म कर रहा है और न ही सब कुछ पहले जैसा छोड़ रहा है। यह नौकरियों को बदल रहा है, कुछ को कम कर रहा है और कई नई भूमिकाएं पैदा कर रहा है। खासकर युवाओं के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एंट्री-लेवल नौकरियों पर सबसे ज्यादा दबाव दिख रहा है।
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 170 मिलियन नई नौकरियां बनेंगी जबकि 92 मिलियन नौकरियां प्रभावित या विस्थापित हो सकती हैं। नेट आधार पर लगभग 78 मिलियन नौकरियों का इजाफा होने का अनुमान है। भारत जैसे देश में जहां हर साल करोड़ों युवा रोजगार बाजार में आते हैं, यह बदलाव और भी गंभीर है।
AI किन नौकरियों को सबसे ज्यादा बदल रहा है?
AI का सबसे बड़ा असर उन कार्यों पर पड़ रहा है जो दोहराव वाले, नियमों पर आधारित और डिजिटल डेटा से जुड़े हैं। इनमें प्रशासनिक काम, डेटा एंट्री, बेसिक कस्टमर सपोर्ट, साधारण रिपोर्टिंग, बेसिक कोडिंग और अनुवाद जैसे काम शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) के अनुमानों के अनुसार, कार्यालय और प्रशासनिक सहायता संबंधी कई भूमिकाओं में मांग घट रही है। प्रोक्योरमेंट क्लर्क, क्रेडिट चेकर, लीगल सेक्रेटरी और कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव जैसी नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो रही हैं। PwC के 2026 AI जॉब्स बैरोमीटर के अनुसार, AI एक्सपोज्ड जॉब्स में स्किल्स बदलाव की गति अन्य नौकरियों से दोगुनी से ज्यादा तेज हो गई है।
भारत में IT सेक्टर पर असर साफ दिख रहा है। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि एंट्री-लेवल IT भूमिकाओं में 20-25 प्रतिशत तक कमी आई है। जूनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, सॉफ्टवेयर टेस्टर, L1 सपोर्ट एजेंट और बेसिक क्वालिटी एश्योरेंस जैसी भूमिकाओं में भर्तियां घटी हैं। कंपनियां अब बेसिक कोडिंग और रूटीन टेस्टिंग के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। नतीजतन 22-25 साल के युवाओं को पहली नौकरी पाने में मुश्किल आ रही है। स्टैनफोर्ड से जुड़े एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च AI एक्सपोजर वाली नौकरियों में इस आयु वर्ग की रोजगार दर में गिरावट आई है।
कस्टमर सपोर्ट में चैटबॉट्स और AI एजेंट्स तेजी से काम संभाल रहे हैं। बैंकिंग बैक-ऑफिस में रीकंसीलिएशन, डेटा एंट्री और कंप्लायंस जैसे काम भी प्रभावित हो रहे हैं। कंटेंट राइटिंग, ग्राफिक डिजाइन और फोटोग्राफी जैसी रचनात्मक भूमिकाओं में भी एग्जीक्यूशन वाले काम घटे हैं जबकि नेतृत्व और रणनीति वाले काम बच रहे हैं।
दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवा, नर्सिंग, चाइल्डकेयर, निर्माण और कई शारीरिक श्रम वाले काम अभी अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं क्योंकि इनमें मानवीय स्पर्श, सहानुभूति और भौतिक उपस्थिति जरूरी है। डॉक्टर, नर्स, टीचर और स्किल्ड ट्रेड्स (इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर आदि) में AI मुख्य रूप से सहायक भूमिका निभा रहा है, न कि पूरी तरह प्रतिस्थापन।
नई नौकरियां और बढ़ती मांग वाले क्षेत्र
AI सिर्फ नौकरियां नहीं बदल रहा, नई भूमिकाएं भी पैदा कर रहा है। मशीन लर्निंग इंजीनियर, AI स्पेशलिस्ट, डेटा साइंटिस्ट, प्रॉम्प्ट इंजीनियर, AI एथिक्स ऑफिसर, ह्यूमन-AI कोलैबोरेशन लीडर, ऑर्केस्ट्रेशन इंजीनियर और नॉलेज आर्किटेक्ट जैसी नई पदवीयां सामने आई हैं।
BLS के अनुमानों के अनुसार, डेटा साइंटिस्ट की नौकरियों में 2024-2034 के बीच 33.5 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है। इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एनालिस्ट, सॉफ्टवेयर डेवलपर और ऑपरेशंस रिसर्च एनालिस्ट जैसी भूमिकाओं में भी तेज वृद्धि का अनुमान है। भारत में AI, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा साइंस में मांग तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में भी AI से जुड़ी भर्तियां हो रही हैं।
युवाओं को कौन-से स्किल्स सीखने चाहिए?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ डिग्री अब पर्याप्त नहीं। कंपनियां स्किल्स-फर्स्ट अप्रोच अपना रही हैं। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, तकनीकी स्किल्स सबसे तेजी से महत्व बढ़ा रहे हैं। AI और बिग डेटा, नेटवर्क्स और साइबर सिक्योरिटी तथा टेक्नोलॉजिकल लिटरेसी सबसे तेजी से बढ़ने वाले स्किल्स में शामिल हैं।
युवाओं को सबसे पहले AI लिटरेसी विकसित करनी चाहिए। इसका मतलब सिर्फ ChatGPT इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि यह समझना कि AI कैसे काम करता है, उसके आउटपुट की आलोचनात्मक समीक्षा कैसे करें, पूर्वाग्रह (bias) कैसे पहचानें और नैतिक मुद्दों को कैसे संभालें। प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, AI टूल्स को वर्कफ्लो में एकीकृत करना और AI के साथ सहयोग करना जरूरी कौशल बन गए हैं।
तकनीकी स्किल्स में डेटा एनालिटिक्स, पायथन या अन्य प्रोग्रामिंग भाषाएं, मशीन लर्निंग की बुनियादी समझ, क्लाउड प्लेटफॉर्म (AWS, Azure, Google Cloud) और साइबर सिक्योरिटी महत्वपूर्ण हैं। जो युवा कोडिंग जानते हैं, उन्हें सिस्टम थिंकिंग, आर्किटेक्चर डिजाइन और AI-असिस्टेड डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए।
लेकिन सिर्फ तकनीकी स्किल्स पर्याप्त नहीं। मानवीय स्किल्स अब और ज्यादा मूल्यवान हो गए हैं। विश्लेषणात्मक सोच (analytical thinking), रचनात्मक सोच (creative thinking), लचीलापन, अनुकूलन क्षमता (resilience, flexibility and agility), जिज्ञासा और आजीवन सीखने की आदत (curiosity and lifelong learning) सबसे ज्यादा मांग में हैं। भावनात्मक बुद्धिमत्ता (emotional intelligence), सहानुभूति, नेतृत्व क्षमता और जटिल समस्याओं को सुलझाने की क्षमता AI के युग में असली ताकत हैं।
PwC की रिपोर्ट बताती है कि AI-एक्सपोज्ड जॉब्स में सहानुभूति, निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मकता जैसे कौशल 2.5 गुना तेजी से जुड़ रहे हैं। जूनियर भूमिकाओं में भी अब नेतृत्व और रणनीतिक सोच की मांग बढ़ रही है।
कैसे तैयार हों युवा?
- लगातार सीखते रहें: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे कोर्सेरा, यूडेमी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनपीटीईएल पर AI, डेटा साइंस और सॉफ्ट स्किल्स के कोर्स करें। व्यावहारिक प्रोजेक्ट बनाएं।
- डोमेन नॉलेज + AI: किसी एक क्षेत्र (हेल्थकेयर, फाइनेंस, मार्केटिंग, शिक्षा आदि) में गहरी समझ विकसित करें और उसमें AI का इस्तेमाल सीखें। उदाहरण के लिए, एक डॉक्टर जो AI टूल्स जानता हो या एक मार्केटर जो AI-बेस्ड एनालिटिक्स इस्तेमाल करता हो।
- प्रैक्टिकल अनुभव: इंटर्नशिप, फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स, ओपन-सोर्स योगदान और हैकथॉन में भाग लें। AI टूल्स को रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करके दक्षता बढ़ाएं।
- नरम कौशल विकसित करें: कम्युनिकेशन, टीम वर्क, प्रेजेंटेशन और समस्या समाधान पर काम करें। ये कौशल AI नहीं सिखा सकता।
- नैतिकता और जिम्मेदारी: AI के सामाजिक प्रभाव, प्राइवेसी और पूर्वाग्रहों को समझें।
भारत में सरकार और उद्योग दोनों इस दिशा में काम कर रहे हैं। कई योजनाओं के तहत युवाओं को AI ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन सफलता व्यक्तिगत प्रयास पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
AI नौकरियों को खत्म नहीं कर रहा बल्कि उन्हें बदल रहा है। जो युवा रूटीन कामों पर निर्भर रहेंगे, उन्हें चुनौती का सामना करना पड़ेगा। जो AI को अपना सहयोगी बनाएंगे, नई स्किल्स सीखेंगे और मानवीय गुणों को मजबूत रखेंगे, उनके लिए अवसर बढ़ेंगे। आज का युवा अगर जिज्ञासु, अनुकूलनशील और निरंतर सीखने वाला बने तो यह युग उसके लिए खतरा नहीं, बल्कि अभूतपूर्व संभावनाओं का द्वार है।
(यह रिपोर्ट विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और भारतीय अध्ययनों, विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum), PwC, अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) तथा अन्य विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोजगार बाजार की स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से नवीनतम जानकारी और अपडेट प्राप्त करते रहें )
