
बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रेखा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। अपनी खूबसूरती, शानदार एक्टिंग और टैलेंट के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग और मजबूत जगह बनाई है। लेकिन उनके करियर की शुरुआत आसान नहीं थी। महज 15-16 साल की उम्र में जब उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा, तो उन्हें अपने सांवले रंग को लेकर ताने भी सुनने पड़े थे। कई लोगों ने उन्हें नजरअंदाज किया, लेकिन एक गाने ने सब कुछ बदल दिया।
साल 1970 में रिलीज हुई फिल्म ‘सावन भादों’ रेखा की हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म थी। इसमें उन्होंने गांव की लड़की चंदा का किरदार निभाया था, जबकि लीड रोल में नवीन निश्चल थे। दोनों के लिए यह डेब्यू फिल्म साबित हुई। फिल्म का गाना ‘कान में झुमका, चाल में ठुमका’ रातोंरात सुपरहिट हो गया। मोहम्मद रफी की जादुई आवाज में गाया गया यह गाना ही रेखा के लिए वरदान बन गया।
संगीत सोनिक-ओमी का था और बोल लिखे थे वर्मा मलिक ने। गाने के बोल – “कान में झुमका, चाल में ठुमका, कमर पे चोटी लटके, हो गया दिल का पुर्जा-पुर्जा, लगे पचासी झटके… तेरा रंग है नशीला, अंग-अंग है नशीला” – सुनते ही दर्शक झूम उठते थे। सिनेमाघरों में जब यह गाना बजता, तो सिक्के उछलने लगते थे। रेखा की सादगी भरी अदाएं, इठलाती चाल और रफी साहब की स्वर लहरियों ने मिलकर कमाल कर दिया।
इस गाने ने न सिर्फ फिल्म को लोकप्रिय बनाया, बल्कि रेखा को भी एक झटके में स्टार बना दिया। पहले जहां रंग को लेकर ताने मिलते थे, वहीं इस गाने के बाद उनकी मांग बढ़ने लगी। रफी साहब की आवाज ने उनके करियर को नई दिशा दी और उन्हें बॉलीवुड की मुख्यधारा में स्थापित कर दिया।
आज 56 साल बाद भी यह गाना यूट्यूब और सोशल मीडिया पर लाखों बार सुना और देखा जाता है। यह साबित करता है कि सच्ची टैलेंट और बेहतरीन आवाज का जादू कभी फीका नहीं पड़ता। मोहम्मद रफी की आवाज रेखा के लिए सच में वरदान साबित हुई थी, जिसने उन्हें रातोंरात स्टारडम की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

