
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026। भारत सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण को राष्ट्रीय विकास का केंद्रीय स्तंभ मानती है। वर्ष 2026 में जेंडर बजट लगभग 5.01 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कुल बजट का 9.37 प्रतिशत है। मिशन शक्ति, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और कई अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, बचत, रोजगार, आवास और सुरक्षा के क्षेत्रों में महिलाओं को सहायता प्रदान कर रही है। इस रिपोर्ट में 2026 में सक्रिय प्रमुख केंद्रीय योजनाओं की पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
1. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह प्रमुख योजना है। पहले जीवित बच्चे के लिए 5,000 रुपये की नकद सहायता दो किस्तों में दी जाती है। दूसरा बच्चा यदि लड़की हो तो अतिरिक्त 6,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। जननी सुरक्षा योजना के साथ मिलाकर कुल लाभ औसतन 6,000 रुपये तक पहुंच जाता है।
पात्रता: 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जो नियमित सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी न हों। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्राथमिकता।
लाभ: मजदूरी की हानि की भरपाई, पोषण सहायता और संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन। अब तक 4.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिल चुका है। आवेदन आंगनवाड़ी केंद्र या पीएमएमवीवाई सॉफ्ट ऐप के माध्यम से होता है।
2. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)
बालिकाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए यह बचत योजना अत्यंत लोकप्रिय है। 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (चक्रवृद्धि) और पूर्ण कर छूट (EEE स्थिति) के साथ यह सबसे आकर्षक सरकारी बचत योजनाओं में से एक है।
पात्रता: 10 वर्ष से कम आयु की बालिका के नाम पर माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं। एक परिवार में अधिकतम दो खाते (जुड़वां/तिजुड़वां की स्थिति में तीन)।
लाभ: न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष जमा। जमा अवधि 15 वर्ष, परिपक्वता 21 वर्ष या 18 वर्ष के बाद विवाह पर। धारा 80सी के तहत कर लाभ। 2026 तक 3.8 करोड़ से अधिक खाते और 1.4 लाख करोड़ रुपये का कोष बन चुका है।
3. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) 2.0
स्वच्छ ईंधन के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता सुधारने वाली यह योजना गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देती है।
पात्रता: गरीब परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला, जिसके पास पहले एलपीजी कनेक्शन न हो। बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता।
लाभ: मुफ्त कनेक्शन के साथ प्रति वर्ष अधिकतम चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी। महिला के नाम पर कनेक्शन जारी होता है। अब तक 10 करोड़ से अधिक कनेक्शन वितरित हो चुके हैं।
4. लाखपति दीदी और DAY-NRLM
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का सबसे बड़ा अभियान। लाखपति दीदी का लक्ष्य स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के परिवार की वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाना है। 2026 में तीन करोड़ का लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया और अब 2029 तक छह करोड़ का नया लक्ष्य रखा गया है।
पात्रता: ग्रामीण क्षेत्रों की 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं जो DAY-NRLM के स्वयं सहायता समूह में शामिल हों। गरीब, विधवा, दिव्यांग और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता।
लाभ: रिवॉल्विंग फंड (20-30 हजार रुपये प्रति समूह), कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (2.5 लाख रुपये तक), 7 प्रतिशत ब्याज पर तीन लाख रुपये तक का बैंक ऋण, कौशल प्रशिक्षण (ड्रोन, सोलर, प्लंबिंग आदि) और बाजार संपर्क। देशभर में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं 92 लाख SHG में संगठित हैं।
5. नमो ड्रोन दीदी और कृषि संबंधित योजनाएं
2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया गया है। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन दिए जाते हैं।
पात्रता: DAY-NRLM से जुड़े महिला SHG।
लाभ: ड्रोन की लागत पर 80 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 8 लाख रुपये तक), पायलट प्रशिक्षण। महिलाएं किसानों को किराए पर स्प्रे सेवा देकर आय अर्जित करती हैं।
अन्य योजनाएं: कृषि सखी (ग्राम स्तर पर कृषि सलाहकार प्रशिक्षण), महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (प्राकृतिक खेती और पशुपालन प्रशिक्षण), और पीएम-किसान में भूमि स्वामित्व वाली महिलाओं को सालाना 6,000 रुपये।
6. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और उद्यमिता सहायता
महिला उद्यमियों के लिए कोलेटरल-फ्री ऋण की सबसे बड़ी योजना।
पात्रता: गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म और लघु उद्यम चलाने वाली महिलाएं।
लाभ: शिशु (50 हजार तक), किशोर (50 हजार से 5 लाख), तरुण (5 से 10 लाख) और तरुण प्लस (10 से 20 लाख रुपये) श्रेणियों में ऋण। महिलाओं को प्राथमिकता और कई बैंकों में 0.25 प्रतिशत ब्याज रियायत। अप्रैल 2026 तक 57 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत, जिनमें दो-तिहाई महिलाओं को मिले।
पीएमईजीपी में महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।
7. मिशन शक्ति: सुरक्षा और सशक्तिकरण का व्यापक ढांचा
मिशन शक्ति दो भागों में विभाजित है—संबल (सुरक्षा) और समर्थ्य (सशक्तिकरण)।
संबल: वन स्टॉप सेंटर (साखी), महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत।
समर्थ्य: पीएमएमवीवाई, शakti सदन, साखी निवास (कार्यशील महिला हॉस्टल), पालना (क्रेच), स्वधार गृह।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान लिंग अनुपात सुधारने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देता है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय वंचित वर्ग की 10-18 वर्ष की बालिकाओं को आवासीय शिक्षा प्रदान करता है।
8. आवास और अन्य कल्याण योजनाएं
प्रधानमंत्री आवास योजना में घर का स्वामित्व महिला के नाम या संयुक्त नाम पर अनिवार्य है। इससे महिलाओं को संपत्ति का अधिकार मिलता है।
जन धन योजना के तहत शून्य बैलेंस खाता, रुपे कार्ड, दुर्घटना बीमा और ओवरड्राफ्ट सुविधा। आयुष्मान भारत के तहत परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर।
महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र (यदि उपलब्ध) दो वर्ष की अवधि के लिए 7.5 प्रतिशत ब्याज और दो लाख रुपये तक जमा की सुविधा देता है।
9. कौशल विकास और रोजगार
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0 में महिलाओं पर विशेष ध्यान। डीडीयू-जीकेवाई और आरएसईटीआई ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देते हैं। स्ववलंबिनी योजना युवा महिलाओं को उद्यमिता प्रशिक्षण और मेंटरशिप प्रदान करती है।
एमजीएनआरईजीएस में महिलाओं की भागीदारी उच्च है। पीएम स्वनिधि स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण सहायता देती है।
राज्य स्तरीय पूरक योजनाएं

केंद्र की योजनाओं के साथ कई राज्यों ने अपनी योजनाएं शुरू की हैं। मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना में पात्र महिलाओं को मासिक 1,500 रुपये मिलते हैं। दिल्ली लक्ष्मी योजना में 21-60 वर्ष की पात्र महिलाओं को मासिक 2,500 रुपये (जिसमें बचत घटक शामिल) दिए जा रहे हैं। कर्नाटक की गृह लक्ष्मी, महाराष्ट्र की लाडकी बहिन और हरियाणा की लाडो लक्ष्मी जैसी योजनाएं मासिक नकद सहायता प्रदान करती हैं। ये राज्य योजनाएं केंद्र की योजनाओं के पूरक के रूप में काम करती हैं।
आवेदन प्रक्रिया और सावधानियां
अधिकांश योजनाओं के लिए आधार, बैंक खाता, आय प्रमाण और निवास प्रमाण आवश्यक हैं। आवेदन आंगनवाड़ी केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर, संबंधित विभाग के पोर्टल या बैंक के माध्यम से किए जा सकते हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ना ग्रामीण महिलाओं के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर महिला को मासिक नकद देने वाली कोई केंद्रीय योजना नहीं है। ऐसे दावे फर्जी होते हैं। केवल आधिकारिक वेबसाइटों और पोर्टलों पर जानकारी लें।
प्रभाव और आगे की राह
इन योजनाओं के परिणामस्वरूप महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 40 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। मुद्रा ऋण में महिलाओं की हिस्सेदारी दो-तिहाई है। स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। जेंडर बजट में निरंतर वृद्धि और नई पहलें जैसे शे-मार्ट (स्वयं सहायता उद्यमी मार्ट) महिलाओं को उद्यमिता की ओर ले जा रही हैं।
2026 में महिला किसान वर्ष के रूप में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को विशेष मान्यता मिली है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि विकास की भागीदार बनाना है।
पात्र महिलाएं अपने निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र, ब्लॉक कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल पर संपर्क करके इन योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं। सही जानकारी और समय पर आवेदन से लाखों महिलाओं का जीवन बदल रहा है। भारत की महिलाओं का सशक्तिकरण देश की प्रगति का आधार बन चुका है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख/रिपोर्ट केवल सामान्य जानकारी एवं जन जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें वर्णित “भारतीय सरकार की महिलाओं के लिए योजनाएं 2026: पात्रता और लाभ” संबंधी विवरण अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों एवं आधिकारिक वेबसाइटों पर आधारित है।
सरकारी योजनाओं के नियम, पात्रता मानदंड, लाभ राशि, आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी योजना का अंतिम एवं आधिकारिक विवरण संबंधित मंत्रालय, विभाग या राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल/अधिसूचना में ही उपलब्ध होता है।
इस सामग्री को सरकारी आदेश, कानूनी सलाह या आधिकारिक गारंटी नहीं माना जाए। कोई भी योजना का लाभ लेने से पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट, आंगनवाड़ी केंद्र, ब्लॉक कार्यालय, कॉमन सर्विस सेंटर या helpline पर जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।
लेखक/प्रकाशक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, हानि या असुविधा के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। फर्जी वेबसाइटों, एजेंटों या गलत दावों से सावधान रहें। केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

